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लेबनान पर इजरायली हमलों से भड़का ईरान, अमेरिका से बातचीत पर लगाई रोक

*गाजा-लेबनान में सैन्य कार्रवाई बंद होने तक नहीं होगी कोई कूटनीतिक वार्ता, तेल बाजार में मचा हड़कंप*

तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को अनिश्चितकाल के लिए रोकने की घोषणा कर दी है। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान और गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती, तब तक वह किसी भी प्रकार की वार्ता में शामिल नहीं होगा।

ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, तेहरान का आरोप है कि इजरायल लगातार युद्धविराम समझौतों का उल्लंघन कर रहा है और लेबनान में हमले जारी रखे हुए है। इसी कारण ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ होने वाले सभी संवाद फिलहाल बंद कर दिए हैं।

*’लेबनान पर हमले अब बर्दाश्त नहीं’*

ईरान का कहना है कि इजरायल द्वारा लेबनान और गाजा में की जा रही सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि इन हमलों पर रोक नहीं लगी तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

*सीजफायर प्रयासों को बड़ा झटका*

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के इस फैसले से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्षविराम प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। साथ ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है।

तसनीम की रिपोर्ट सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

*ईरान की पुरानी मांग दोहराई*

ईरान लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि किसी भी संघर्षविराम समझौते में केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगी देशों और इजरायल की सैन्य गतिविधियां भी शामिल हों। तेहरान का कहना है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक आगे की बातचीत संभव नहीं है।

*आईआरजीसी की बढ़ी भूमिका*

रिपोर्टों के अनुसार, अब ईरान की सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका पहले से अधिक मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय संकट से जुड़े फैसलों में आईआरजीसी प्रमुख भूमिका निभा रही है।

*अमेरिका और ईरान आमने-सामने*

तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने दावा किया कि उसके एक ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद उसने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया।

*बढ़ सकता है पश्चिम एशिया का संकट*

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत जल्द बहाल नहीं हुई तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहरा सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हैं, जहां लिए जाने वाले अगले फैसले पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकते हैं।

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