लखनऊ- उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव होने तक गांवों की जिम्मेदारी मौजूदा ग्राम प्रधानों को सौंपे जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक समिति बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। बताया जा रहा है कि पंचायती राज विभाग इस संबंध में जल्द आदेश जारी कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनाव में देरी की कई वजहें सामने आ रही हैं। पंचायत वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन 10 जून को होना प्रस्तावित है, जबकि ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन अभी बाकी है। इसके अलावा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी विचाराधीन बताया जा रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं।
अब तक पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर एडीओ (ADO) या बीडीओ (BDO) को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी देने का फैसला किया है।
राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि स्थानीय समस्याओं और ग्रामीण जरूरतों को ग्राम प्रधान बेहतर तरीके से समझते हैं, इसलिए गांवों के विकास कार्यों में तेजी आएगी।
प्रदेश में वर्तमान समय में 57,695 ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। वहीं 2021 पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने 648 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा को 67 सीटें मिली थीं।
अब प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर सरकार के अगले आधिकारिक आदेश पर टिकी हुई है।







