रिपोर्टर रजत गुप्ता संवाददाता राजेपुर
फर्रुखाबाद/राजेपुर। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से अमृतपुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। ऊपरी क्षेत्रों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण हमीरपुर, बरुआ, इमादपुर सोमवंशी, बुड़िया भेड़ा, नगरिया जवाहर, जगतपुर, सबलपुर, उदयपुर, आशा की मढ़ैया, पूर्वी गोटिया, पश्चिमी गोटिया, चित्रकूट, अमरपुर, तीसराम की मढ़ैया और खानपुर समेत दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं। गांवों में पानी भरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
बाढ़ का पानी घरों और खेतों तक पहुंचने से फसलें डूब गई हैं, जबकि हरा चारा नष्ट होने से पशुपालकों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार अपने मवेशियों को लेकर बदायूं-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे किनारे पॉलिथीन डालकर रहने को मजबूर हैं।
आशा की मढ़ैया गांव का संपर्क लगभग टूट चुका है और वहां आने-जाने के लिए केवल नाव ही सहारा बची है। चित्रकूट स्थित घाटू श्याम मंदिर के आसपास भी बाढ़ का पानी भर गया है। मंदिर के पुजारी सुखदेव ने बताया कि लेखपाल की ओर से नाव की व्यवस्था कराई गई है, जिससे श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, मंदिर तक पहुंच पा रही हैं।
चित्रकूट निवासी महेश ने आरोप लगाया कि अब तक प्रशासन की ओर से राहत सामग्री या अन्य जरूरी सहायता नहीं पहुंचाई गई है। उन्होंने बताया कि फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं और पशुओं के चारे का भीषण संकट बना हुआ है। महेश, संतोष, ओमकार, रमाकांत, जयपाल, पप्पू, रामादेवी, पवन कुमार, गिरीश और हरिराम सहित कई ग्रामीण खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे रहने को विवश हैं।
मौके पर पहुंचे लेखपाल पवन कुमार और रविंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था गंगापार स्थित महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, राजेपुर में की गई है, लेकिन कई ग्रामीण वहां जाने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने भी लोगों से सड़क किनारे रहने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
उधर, चित्रकूट डिप पर करीब तीन फीट पानी बहने के बावजूद बाइक, टेंपो और चारपहिया वाहन जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर डिप पर बैरिकेडिंग कर मार्ग बंद किया जाएगा। इसके बाद वाहनों का आवागमन राजेपुर-डाबरी, जमापुर और शाहजहांपुर मार्ग से कराया जाएगा।

वहीं बुड़िया भेड़ा से इमादपुर जाने वाला संपर्क मार्ग भी बाढ़ के कारण बंद हो गया है। सबलपुर गांव के पास स्वास्थ्य विभाग ने अस्थायी स्वास्थ्य शिविर लगाकर बाढ़ प्रभावित लोगों को दवाइयां उपलब्ध करानी शुरू कर दी हैं।

फिलहाल बढ़ता जलस्तर और सीमित राहत व्यवस्था बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ा रही है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।










